हेल्लो,
मित्रों मैं संजय आनंद आपसे अपनी मन की वाणी कहना चाहता हूँ ,यदि त्रुटि हो तो ये मानिए कि कोई भी मनुष्य संपूर्ण नहीं है.आज इन्हीं शब्दों के साथ ,
आपका
संजय आनंद
विश्वविद्यालय परिसर का मोहपाश
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आज रविवार को माँ शाकुंभरी विश्वविद्यालय परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। छुट्टी
के दिन मैं अकेला ही था। अपने आवास में बिस्तर पर लेटा हुआ लखनऊ से किसी
समाचार क...
3 weeks ago

कहे सुने कछु नहीं, पहिले सफाइए देने लगे।
ReplyDeleteस्वागत है आप का और इंतजार है आप की कम्प्यूटर कलम का।
सबसे पहले आपका स्वागत है...
ReplyDeleteऔर अब हम दूसरी पोस्ट पर जाते हैं...