शुभ-विदा सहारनपुर
-
प्रयागराज में कार्यभार ग्रहण करने के बाद वापस सहारनपुर आया था अपना
बोरिया-बिस्तर बांधकर ले जाने के लिए। गृहस्थी का सामान ट्रक पर लदवाकर अपने
नए ...
thinking of my father ऐसे ही
-
नागेन्द्र हाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय नमश्शिवाय
...
पिताजी स्नान करते हुये जिन स्तोत्रों को गाते थे, ज्ञात नहीं कि ऐसा करना
शास्त्रसम्मत है भी या न...
कृष्ण अस्त्र
-
कुमुद कौमुदी गदा देवी,
सहस्रार चक्र सु-दर्शन,
वनमृग शृङ्ग शार्ङ्ग चाप,
पाञ्चजन्य पञ्चजन आह्वान -
मैं जीवन में एक बार
केवल एक बार
हुआ स्तब्ध !
कुरु सखी पा...
रिश्ते...
-
ब्लाॅग लिखने से बढ़िया कुछ नहीं...:-) :-) _______________________________
वक़्त की साज़िश से, रिश्ते पनप तो जाते हैं, मगर उनको कहानी बनते, देर नहीं
लगती .....
क़ुरआन रूरह ताहा २०
-
*रूरह ताहा २०*
(दूसरी किस्त)
*सब रवाँ मिर्रीख१ पर और आप का यह दरसे-दीन२
,कफिरीनो-मुशरिकीनो-मुनकिरीनो-मोमनीन3।रौशनी कुछ सर पे कर लो, ताकि प...
विलम्ब से किया गया कार्य निष्फल होता है आर्य।
ReplyDeleteप्रतियोगिता में भाग न ले पाए तो क्या हुआ? इसे यहीं रखिए। शायद किसी सड़क के अन्धे की नज़र कभी इस ब्लॉग पर पड़ जाय और ढक्कन लग जाय।